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हाइवे पर आवारा मवेश हो रहे हादसे के शिकार, देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश में हुआ था गौ कैबिनेट का गठन, लेकिन आज भी व्यवस्था बनी हुई है बदतर

भोपाल। मध्यप्रदेश में गायों के संरक्षण के नाम पर सरकार लाखों रुपए पानी की तरह बहा रही है। इसके बावजूद प्रदेश के शहरों की सड़कें हो या हाईवे सैकड़ों की संख्या में गायें और अन्य मवेशी काल बनकर टहल रहे हैं। मवेशियों के अचानक सड़कों पर आने से वाहन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। जगह-जगह झुंड के रूप में बैठे पशु हादसों की वजह बने हुए हैं। मवेशियों के बीच सड़क पर बैठने से राहगीरों व गाडिय़ों को निकलने में परेशानी होती है। आए दिन बीच सड़क पर बैठे पशुओं से हादसे हो रहे हैं।

NH-46 पर मवेशी हो रहे हादसे के शिकार

हाइवे पर मवेशियों के झुंड के झुंड दौड़ लगाते है। डिवाइडर पर अचानक कूदकर दूसरी तरफ निकल जाते हैंं। मवेशियों के अचानक सामने आने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर हादसाग्रस्त हो जाते हैं। नेशनल हाईवे 46 पर जगह-जगह आवारा मवेशियों के झुंड ने अपना डेरा बना रखा है। ऐसे में तेज गति से आने वाले वाहनों की चपेट में आने से अब तक कई जानवरो की मौत हो चुकी है, वहीं कई जख्मी हुए है।

सड़कों पर मवेशियों के जमावड़ा

मध्य प्रदेश की सड़कों पर अब सफर करना जोखिमभरा होता जा रहा है। मुख्य सड़क पर मवेशियों के जमावड़ा के कारण लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान दिया जा रहा है, और मवेशियों का जमावड़ा हटने का नाम नहीं ले रहा है। वैसे तो मध्य प्रदेश सरकार ने अवारा पशुओं से मुक्ति दिलाने और गौवंश को सरंक्षित करने के लिए गौशालाएं खोलने की घोषणा तो की और कहीं-कहीं खुली भी, लेकिन अभी तक आवारा पशुओं से राहत मिलती हुई दिखाई नहीं दे रही है।

खुद को गाय सेवक बताती है भाजपा और कांग्रेस

दरअसल मध्यप्रदेश में गाय और गौशालाओं पर पिछले कुछ साल से जमकर सियासत का रंग चढ़ा है। खुद को गाय सेवक बताने में भाजपा और कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी, बावजूद इसके प्रदेश में गौवंश के हालात अभी तक नही सुधरे हैं। खुद को गायों का हितैषी बताने वाली शिवराज सरकार ने तो प्रदेश में गोपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड का गठन तक कर डाला है और प्रति गाय का एक दिन का खर्च 20 रुपए तक निर्धारित है।

256.77 करोड़ खर्च किए, लेकिन नहीं सुधरे हालात

प्रदेश की गौशालाओं पर नजर डाले तो यहां वर्तन में 2200 गौशालाएं सक्रिय हैं। इनमें से सरकार द्वारा 1587 गौशालाएं चलाई जा रही है यहां 2 लाख 55 हजार गौवंश पल रहा है। इसके अलावा प्राइवेट संस्थाओं द्वारा 627 गौशाला चला रही हैं। इनमें 1 लाख 73 हजार 874 गौवंश का पालन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने राज्य में मुख्यमंत्री गौसेवा योजना की शुरुआत की है और इसके लिए 256.77 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल तो ये उठता है कि सरकार ने गायों के लिए अलग बोर्ड बना तो दिया और उसके लिए पर्याप्त बजट भी दिया जा रहा है फिर क्या वजह है कि व्यवस्था ठीक नहीं हो पा रही है।

बतादें, गायों के संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश में गौ कैबिनेट का गठन किया गया है। गौ कैबिनेट का गठन करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। इसके गठन को पूरे दो साल बीत चुके है, बावजूद इसके प्रदेश में अभी तक गौशालाओं के हालात नहीं सुधरे हैं।

(अभिजीत, गौ ज्ञान फाउंडेशन)

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