
बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली पुलिस ने साइबर ठगी और हवाला में शामिल एक नाइजीरियाई नागरिक को गिरफ्तार कर शुक्रवार को जेल भेज दिया। पुलिस ने इसकी जानकारी दी । पुलिस के अनुसार नाइजीरियाई नागरिक रॉबर्ट एरोमी ओजो दिल्ली की खुफिया एजेंसियों को गच्चा देकर 10 वर्षों से बिना वीजा के भारत में रह रहा था और यहां साइबर ठगी से रकम एकत्र कर नाइजीरिया में अपने साथियों को भेजता था, जो वहां लागोस में सरकार विरोधी आंदोलन कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को उससे मिली जानकारी के बाद मिलिट्री इंटेलिजेंस व खुफिया टीम आगे जांच कर रही हैं। वहीं मामले में तीन बैंकों के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच खुफिया एजेंसी कर रहीं हैं।
बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सजवान ने बताया कि नाइजीरियाई रॉबर्ट को गिरफ्तार कर थाना फरीदपुर में धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेराफेरी समेत कई सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर जेल भेजा गया है। पुलिस अधीक्षक (देहात) राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि रॉबर्ट को बुधवार को फरीदपुर के गोंटिया इलाके में हरपाल ऊर्फ मेहंदी हसन के घर से पकड़ा गया था, जब वह खाते में जमा किए गए पैसे को कथित तौर पर वसूल करने के लिए वहां गया था। पुलिस अधीक्षक (अपराध) सुशील कुमार ने बताया कि हरपाल का असली नाम मेहदी हसन है, उसने फर्जी नाम से राजस्थान और नोएडा में एक एक बैंक खाता खुलवा रखा है और अरबाज उसका बेटा है उसने भी दिल्ली में दो खाते खुलवा रखे हैं।
उन्होंने बताया कि इन्हीं चारों खातों में चार बार में करीब 80 लाख रुपए का लेनदेन हुआ है। फरीदपुर के हरपाल उर्फ मेहंदी हसन और उसके बेटे के आलावा मामले में नामजद दो अन्य अभियुक्तों की तलाश में एसओजी समेत कई टीमों को लगाया गया है जल्दी ही उन्हें पकड़ लिया जाएगा। पूछताछ में रॉबर्ट ने पुलिस को बताया कि वह वर्ष 2010 में भारत आया था। वर्ष 2011 में उसका वीजा समाप्त हो गया इसके बावजूद वह लौटा नहीं। दिल्ली में बार-बार ठिकाना बदलता रहता है। इस समय द्वारका में रहता है। यह भी माना जा रहा है कि इसमें कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। बैंक सूत्रों के अनुसार इतनी रकम ट्रांसफर होने पर लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को दी ही जाती है और सभी खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। अग्रवाल ने बताया कि रॉबर्ट के साथ कई अन्य नाइजीरियन भी हैं, जो ठगी करते हैं।
उन्होंने दिल्ली में एक गिरोह बनाया है जो पैसे ट्रांसफर के लिए कई बेरोजगारों के खाते कमीशन पर ले लिए हैं। उसने स्वीकारा कि ठगी की रकम जिस खाताधारक को ट्रांसफर करता था, उसे 10 फीसद कमीशन देता था और पांच फीसद रकम खुद के लिए रखता व बाकी नाइजीरिया भेज देता था। पुलिस इस प्रकरण को हवाला से जोड़ रही है। ठगी का मामला मानते हुए अग्रवाल ने उससे पूछताछ शुरू की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए, उसने कहा कि नाइजीरिया के लागोस में सरकार विरोधी आंदोलन चल रहा है और वह उसका हिस्सा है। भारत में रहकर साइबर ठगी करता है और इससे मिलने वाली रकम नाइजीरिया में रहने वाले आंदोलनकारी साथियों को भेजता है।
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