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गंधर्ववेद संगीत के साथ विश्व शांति की स्थापना होगी-ब्रह्मचारी गिरीश

आम सभा, भोपाल : महर्षि महेश योगी संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश जी ने आज महर्षि महेश योगी जी की 104वीं जयंती के अवसर पर आयोजित युग दिवस समारोह में कहा कि, महर्षि गंधर्ववेद संगीत से ही विश्व शांति की स्थापना होगी।

इस अवसर पर अनंत श्री विभूषित ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य, बद्रिकाश्रम, हिमालय वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने ब्रह्मचारी गिरीश जी के इस निर्णय पर वीडियो काल संदेश के माध्यम से शुभकामनाएं प्रेषित की। भोपाल स्थित ब्रह्मानंद सरस्वती आश्रम में आज महर्षि महेश योगी जी की 104वीं जयंती ज्ञान युग दिवस के रूप में मनाई गई। गुरूपूजन एवं गुरूवंदना के पश्चात ब्रह्मचारी गिरीश जी ने अपने उद्बोधन में महर्षि गंधर्ववेद संगीत के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, महर्षि जी ने इस कार्य को बहुत पहले स्थापित किया था, लेकिन उनके सपनों को साकार करने के लिए महर्षि गंधर्ववेद संगीत के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए महर्षि जी के सहेज कर रखे हुए ज्ञान के भंडार को इंटरनेट एवं नए एप बनाकर जन-मानस के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

ब्रह्मचारी जी ने बताया कि, पूर्व में स्थापित किये गए महर्षि गंधर्ववेद विश्वविद्यापीठ से 200 से अधिक कलाकार निकल कर विभिन्न संस्थाओं से जुड़कर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

महर्षि जी ने ‘‘बसुधैव कुटुम्बकम’’ के लिए विश्व शांति की परिकल्पना की जिसके लिए हम सभी को कार्य करना है। महर्षि जी ने हम सभी के लिए मानव जीवन की संहिता बना दी है जिसमें भावातीत ध्यान, सिद्धि, यौगिक फ्लाईंग, आयुर्वेद, स्थापत्यवेद और ज्योतिष की प्राद्योगोकियाँ शामिल हैं। महर्षि जी ने वर्ष 1957 में योग को पुर्नस्थापित किया जो कि आज एक बड़ा वृक्ष बन चुका है। यही स्थिति यज्ञ, अनुष्ठान एवं ज्योतिष के क्षेत्र में भी हैं। अब समय आ गया है कि योग को यज्ञ के साथ जोड़ दिया जाना चाहिए। महर्षि जी ने कहा था कि यह शांति का तत्व है अर्थात् यदि जीवन में शांति है तो पूरा जीवन संघर्ष मुक्त होगा। शांति खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह शांति हमारी चेतना में मौजूद है और भावातीत ध्यान के नियमित अभ्यास से इसे प्राप्त किया जा सकता है।

ब्रह्मचारी गिरीश जी ने आगे कहा कि महर्षि गंधर्व वेद को सामान्य भाषा में हम संगीत कहते हैं। इसकी उत्पत्ति भगवान शिव से हुई है। यह ज्ञान की परंपरा हमें गुरु-शिष्य परंपरा से प्राप्त हुई है। गुरु-शिष्य परंपरा से जो लोग संगीत की शिक्षा प्राप्त करते हैं वह संगीतज्ञ कहलाते हैं। इसलिए इस वर्ष हमें गंधर्व वेद पर ज्यादा कार्य करना है।

हमने ‘महर्षि जी डाटनेट’ बेवसाईट बनाई है जिसमें महर्षि जी के ज्ञान को डाला जा रहा है। जल्द ही ‘महर्षि जी’ नाम का ऐप भी तैयार हो रहा है। इसके पश्चात् ब्रह्मचारी गिरीश जी एवं मंचासीन समस्त निदेशकों ने ज्ञान मैगजीन, ई-ज्ञान मासिक न्यूज लेकर, महर्षि विश्व शांति आंदोलन का पाक्षिक न्यूज लेटर, महर्षि वैदिक पंचांग, टेबल केलेंडर, महर्षि इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट का टेबल केलेंडर एवं महामीडिया मैग्जीन का लोकार्पण करके गुरु चरणों में समर्पित किया एवं विस्तारपूर्वक हाल ही में सत्तर से अधिक उत्पादों को महामीडिया नेचर के नाम से लांच करने की जानकारी दी जिसमें आयुर्वेद, दैनिक उपयोगी महा हर्बल, महा धूप, महा अचार, महा साबुन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया।

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