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खुद को भारतीय सेना का क्‍लर्क बताते थे पाकिस्‍तान उच्‍चायोग में काम करने वाले जासूस, मिलिट्री इंटेलीजेंस ने ऐसे पकड़ा..

नई दिल्ली:

पाकिस्तान उच्‍चायोग के वीज़ा सेक्शन में असिस्टेंट वीज़ा ऑफिसर के तौर पर काम करने वाले 42 साल के आबिद हुसैन और 44 साल के मोहम्मद ताहिर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रविवार को दिल्ली के करोलबाग से हिरासत में लिया. इन पर आरोप है कि ये दोनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करते हैं और भारत में जासूसी कर रहे थे. खुफिया एजेंसी के सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान के पंजाब का रहने वाला आबिद हुसैन और इस्लामाबाद का रहने वाला मोहम्मद ताहिर दोनों पहले पाकिस्तान आर्मी से जुड़े. ISI के एक सीक्रेट प्लान के तहत 2013 में इनको भारत भेजा गया और दोनों दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाईकमीशन में वीज़ा सेक्शन में काम करने लगे. ये दोनों खुद को भारतीय सेना का क्लर्क बताते थे और खुद की पोस्टिंग दिल्ली स्थित भारतीय आर्मी के सेंट्रल बोर्ड पोस्ट ऑफिस में बताकर भारतीय सेना में सेंध लगाने में जुटे थे. ISI अपने प्लान को सफल बनाने के लिए हर महीने इन तक मोटी रकम पहुंचा रही थी.

जानकारी के अनुसार, ISI इनके जरिए देश के सभी बॉर्डर पर सेना की तैनाती और हथियारों की खेप से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करना चाहती थी. ये दोनों सेना के कुछ जवानों के घर तक में घुसपैठ कर चुके थे ताकि उनके जरिये अहम जानकारियां हासिल कर ली सके. लेकिन इन दोनों के जासूसों की भनक मिलिट्री इंटेलीजेंस (MI) को लग गयी और MI ने इस साल के शुरुआत से ही इन दोनों को पकड़ने के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया. एमआई के 3-4 अफसर इनके संपर्क में आये और सेना से जुड़ी जानकारी देने के बहाने इनसे एक ऑपेरशन के तहत बातचीत करने लगे और मिलने लगे. एमआई ने इनके साथ हुई मीटिंगों की खुफिया कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की और फोन पर हुई बातचीत की भी रिकॉर्डिंग की.

रविवार को ये दोनों फिर करोलबाग में सेना के जवानों से मिलने आये थे,जब दोनों को वहां से पकड़ा गया तो ड्राइवर जावेद कार को भगाने लगा. इसी दौरान कार का आगे का शीशा भी टूट गया. आबिद के पास से नकली भारतीय आधार कार्ड बरामद हुआ है जिस पर नासिर गौतम और दिल्ली के गीता कॉलोनी का पता लिखा हुआ है. जब इनको पकड़ा गया तो ये दोनों खुद को गीता कॉलोनी का बता रहे थे. इन दोनों के पास से भारतीय सेना के कुछ खुफिया दस्तावेज भी बरामद हुए हैं. जिसमे सेना की डिप्लॉयमेंट और मूवमेंट की जानकारी थी. जांच एजेंसियां अब ये पता लगा रही हैं की ये भारत में इन दोनों ने किन-किन लोगों से बातचीत की है और कौन-कौन लोग इनको जानकारी दे रहे थे. सूत्रों की मानें तो ये लोग कुछ रेलवे के कर्मचारियों के संपर्क में थे.ड्राइवर जावेद भी पाकिस्तान आर्मी से जुड़ा था और वह भी इस जासूसी के रैकेट का हिस्सा था उसे भी वापस भेजा जा रहा है.

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