नई दिल्ली:
नागरिकता संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा, लेकिन विपक्ष की तरफ से इसके जोरदार विरोध की संभावना है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि ‘नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. हम बंगाल में CAB के कार्यान्वयन की अनुमति नहीं देंगे. ममता बनर्जी ने कहा कि मैं अन्य राजनीतिक दलों से CAB का समर्थन नहीं करने का आग्रह करती हूं.’
गौरतलब है कि इससे पहले RJD ने भी CAB का विरोध किया था. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने ट्वीट कर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया था. पार्टी ने एक के बाद एक दो ट्वीट कर बिल पर आपत्ति जताई थी और नागरिकता संशोधन बिल की तुलना नोटबंदी से की थी. RJD ने लिखा की तरफ से लिखा गया था, “जिस तरह मोदी सरकार ने नोटबंदी के रास्ते तथाकथित कालेधन से निबटने की सारी जिम्मेदारी, तकलीफ़ नागरिकों के सर डाल दिया, उसी तरह NRC में नागरिकों पर ही जिम्मेदारी और दबाव डाल दिया गया है कि वो सिद्ध करें कि कौन नागरिक है कौन नहीं, तो नीम हकीम सरकार का काम सिर्फ प्रताड़ित करना है?”
नागरिकता कानून देश का डीएनए बदलने की कोशिश
बता दें कि नागरिकता संसोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा. नागरिकता विधेयक, यानी सिटिज़नशिप बिल या CAB को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दे दी थी, जिसके ज़रिये पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सकेगी. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के सांसदों से कहा था कि यह विधेयक शीर्ष प्राथमिकता है, और उतना ही अहम है, जितना जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के लिए अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर लाया गया प्रस्ताव था.
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