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महाराष्ट्र के ‘महाभारत’ में किसके साथ जाएंगे शरद पवार?

मुंबई
महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच जारी खींचतान में जो व्यक्ति सबसे फायदे में है वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार हैं. पवार और मुलायम सिंह यादव के बारे में कहा जाता है कि राजनीतिक में जब वो मोहरे चलते हैं तो उसका अंदाजा हार-जीत के माह बाद आता है. उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह ने जिस तरह अपने बेटे अखिलेश यादव को राजनीति में स्थापित किया उसका अंदाजा राजनीति में उनके सबसे करीबी और सगे भाई शिवपाल यादव तक नहीं लगा सके. कुछ यही हाल महाराष्ट्र में शरद पवार का है, पवार की चाल का अंदाजा 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद देखने को मिला था जब उन्होंने अपने एक ही चाल से शिवसेना का चित्त कर दिया था और शिवसेना को मजबूरी में पांच साल तक बीजेपी सरकार का साथ देना पड़ा. इससे पवार की महाराष्ट्र और देश में बीजेपी विरोधी छवि बनी रही. इस बार के विधानसभा चुनाव में शरद पवार की पार्टी एनसीपी ही सरकार विरोधी सबसे बड़े दल के रुप में उभरी है.

2014 के जैसे ही हालात
इस बार के विधानसभा चुनाव के बाद हालात 2014 जैसे ही दिख रहे हैं. हालांकि इस बार बीजेपी और शिवसेना का आपस में गठबंधन है लेकिन जिस तरह चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना बीजेपी पर आक्रामक है. उसे देखते हुए शरद पवार को अपने मोहरे सजाने का मौका मिल गया है.

बीजेपी के साथ जाने में NCP को दिख रहा फायदा
सूत्रों की मानें तो शरद पवार शिवसेना और बीजेपी दोनों दलों के नेताओं के संपर्क में हैं और फिलाहल बीजेपी के साथ जाने में उन्हें फायदा दिख रहा है. पवार के करीबी सूत्रों का दावा है कि अगर बीजेपी शिवसेना में अगले दो-तीन दिन में सहमति नहीं बनती है तो पवार अपने पत्ते खोल देंगे. एनसीपी के एक धड़े ‌का मामना है कि बीजेपी के साथ जाने से पार्टी विश्वास मत में अनुपस्थित रहकर भी बीजेपी सरकार की मदद कर सकती है. ऐसे में केंद्र सरकार में पार्टी की सरकार विरोधी छवि पर असर भी नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने कई मुद्दों को लेकर बारगेन भी कर सकती है.

फैसले में लगेगा अभी और वक्त
महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बीजेपी के पास नौ नवंबर तक का वक्त है. ऐसे में पार्टी किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं है, सरकार के शपथ ग्रहण करने के बाद भी राज्यपाल बहुमत साबित करने के लिए 30 दिन तक का समय दे सकते हैं. इस तरह देखें तो बीजेपी के पास बहुमत का जुगाड़ करने के लिए करीब 40 दिन का समय है. राज्यपाल यदि समय में कटौती कर उसे 25 दिन कर देते हैं और सरकार पांच नवंबर तक शपथ ग्रहण करती है तब भी बहुमत के लिए 20 दिन का समय सरकार के पास है. ऐसे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एनसीपी से किसी तरह की मदद लेने से पहले शिवसेना से पूरी तरह मोलभाव कर लेना चाहते हैं.

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