जगदलपुर.
बस्तर के बास्तानार-कोड़ेनार क्षेत्र में कानून से पहले सामाजिक व्यवस्था का प्रभाव आज भी मजबूत माना जाता है। यहां दंडामी माड़िया समाज वर्षों पुरानी परंपरा का पालन करता आ रहा है। अपराध के कारण कोई व्यक्ति जेल जाता या सार्वजनिक अपमानित होता है, तो समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है।
बहिष्कृत व्यक्ति तब तक सामाजिक आयोजनों में शामिल नहीं हो सकता, जब तक पूरे समाज को सामूहिक भोज न दे। इस भोज में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं और आयोजन में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। कई परिवारों को इसके लिए कर्ज लेना या जमीन गिरवी रखना पड़ता है। ग्रामीणों का मानना है कि यही सामाजिक दंड लोगों को अपराध से दूर रहने के लिए प्रेरित करता है। इसी कारण क्षेत्र के कई गांवों में चोरी और हिंसक घटनाएं अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि यहां कई घरों में आज भी ताले लगाने की जरूरत महसूस नहीं होती। कोड़ेनार थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में यह सामाजिक व्यवस्था अब भी प्रभावी मानी जाती है। हालांकि आधुनिक कानून व्यवस्था के दौर में इस परंपरा को लेकर अलग-अलग राय भी सामने आती है। फिर भी यह व्यवस्था बस्तर की सामाजिक संरचना और सामुदायिक अनुशासन की एक अलग पहचान बनी हुई है।
Dainik Aam Sabha