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मध्यप्रदेश और फ्रांस का सहयोग औद्योगिक विकास, नवाचार और वैश्विक निवेश के नए अवसर तैयार करेगा : मंत्री काश्यप

भोपाल 

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश आज शांति, स्थिरता और औद्योगिक संभावनाओं का मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप निवेशक-अनुकूल नीतियां विकसित की हैं, जिससे उद्योगों के लिए भरोसेमंद और सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के हृदय स्थल पर स्थित होने के कारण भारत के प्रमुख बाजारों तक सहज और संतुलित पहुंच प्रदान करता है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई नेटवर्क अत्यंत सुगम एवं किफायती बनता है। मंत्री  काश्यप ने यह बात कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में इंडो-फ्रेंच कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कही।

मंत्री  काश्यप ने कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश तेजी से नई संभावनाएं विकसित कर रहा है। सिंचाई क्षमता में हुए विस्तार से कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को विशेष गति मिली है। मंत्री  काश्यप ने कहा कि कारोबार सुगमता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देश में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है तथा निवेशकों के लिए पारदर्शी और उद्योग समर्थक वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस सहित यूरोपीय देशों के साथ मध्यप्रदेश की औद्योगिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और ऐसे आयोजन वैश्विक निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश और फ्रांस के बीच यह सहयोग आने वाले समय में और अधिक सशक्त होगा तथा यह साझेदारी औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति के नए अवसर तैयार करेगी।

फ्रासं और भारत के बीच दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी हो रही है मजबूत : फ्रांस के राजदूत  मथाउ

भारत में फ्रांस के राजदूत  थिएरी मथाउ ने कहा कि इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने अपनी उद्योग अनुकूल नीतियों और निवेश समर्थक वातावरण के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए नई संभावनाएं निर्मित की हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस और भारत के बीच दीर्घकालिक एवं भरोसेमंद साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है तथा दोनों देश आर्थिक सहयोग, नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत में 700 से अधिक फ्रांसीसी कंपनियां कार्यरत हैं, जो रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, कृषि, अधोसंरचना, रिटेल, जैव विविधता, शिक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में फ्रांस की कंपनियां मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश के साथ फ्रांस के सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में शिक्षा, पर्यटन, अकादमिक आदान-प्रदान और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग और अधिक विस्तारित होगा।

त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और तेज क्रियान्वयन की कार्य संस्कृति : मुख्य सचिव  जैन

मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश निवेश आधारित औद्योगिक विकास को गति देने के लिए उच्च संभावनाओं वाले क्षेत्रों पर रणनीतिक रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने बाबई औद्योगिक क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वीकृति मिलने के तुरंत बाद परियोजना पर कार्य प्रारंभ हुआ और अल्प समय में ही पूरे औद्योगिक क्षेत्र का आवंटन कर 11 इकाइयों का भूमि पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग सहित कई क्षेत्रों में तेजी से निवेश और विस्तार हो रहा है तथा उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए 18 नई क्षेत्रीय नीतियां लागू की गई हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि निवेश प्रक्रियाओं को पूरी तरह सरल और पारदर्शी बनाया गया है तथा फ्रांस की प्रमुख कंपनियों और वैश्विक संस्थाओं की मध्यप्रदेश में लगातार रुचि बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मंडला में महत्वपूर्ण परमाणु ऊर्जा परियोजना विकसित की जा रही है तथा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मजबूत अधोसंरचना और निवेश अनुकूल वातावरण : प्रमुख सचिव  सिंह

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव  राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी केंद्रीय भौगोलिक स्थिति के कारण देश के लगभग 50 प्रतिशत उपभोक्ता बाजार तक सहज पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि मजबूत औद्योगिक अधोसंरचना, 31 गीगावाट विद्युत क्षमता, प्रचुर जल उपलब्धता, 8 एयरपोर्ट, 5 आर्थिक कॉरिडोर, विस्तृत सड़क नेटवर्क और एक लाख एकड़ से अधिक औद्योगिक भूमि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस के साथ फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग, एयरोस्पेस और मेडिकल डिवाइसेस जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश से फ्रांस को लगभग 290 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, फूड इंडस्ट्री अवशेष, एल्युमिनियम उत्पाद और टेक्सटाइल प्रमुख रहे। उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो प्रणाली, जीआईएस आधारित भूमि आवंटन, अनुपालन सरलीकरण तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाओं ने निवेशकों के लिए उद्योग स्थापना को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया है।

इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की महानिदेशक सु पायल एस. कंवर ने कहा कि मध्यप्रदेश फ्रांसीसी निवेश के लिए तेजी से उभरता हुआ विकास केंद्र है और यह कॉन्क्लेव व्यापार, नवाचार और सतत विकास के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच व्यापारिक संबंधों को और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न राज्यों में निवेश कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं तथा मध्यप्रदेश संस्करण राज्य स्तरीय सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा।

कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर में आयोजित इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव-2026 में भारत और फ्रांस के बीच औद्योगिक, आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने पर व्यापक मंथन हुआ। इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम तथा भारत स्थित फ्रांस दूतावास के सहयोग से आयोजित कॉन्क्लेव में फ्रांस की प्रमुख कंपनियों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं तथा शासकीय अधिकारियों ने भागीदारी की। कार्यक्रम में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय, स्वास्थ्य, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, संचार, सतत विकास, हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण तथा सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में निवेश एवं साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

कॉन्क्लेव के पूर्व फ्रेंच डेलिगेशन ने मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय का भ्रमण कर प्रदेश की जनजातीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को देखा। अगले दिन प्रतिनिधिमंडल ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका शैलाश्रय का भ्रमण कर वहां संरक्षित 30 हजार वर्ष से अधिक पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। कॉन्क्लेव प्रारंभ होने से पूर्व प्रतिनिधियों के लिए नेटवर्किंग सत्र में उद्योगों और निवेश संभावनाओं पर संवाद हुआ।

कार्यक्रम का प्रारंभ इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की उपनिदेशक सु ऋषिका रॉय के स्वागत उद्बोधन से हुआ। इसके पश्चात औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव  राघवेंद्र कुमार सिंह ने “डूइंग बिजनेस इन मध्यप्रदेश : पॉलिसी, प्रोत्साहन एवं सुगम पहुंच” विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए राज्य की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन, सिंगल विंडो व्यवस्था, औद्योगिक अधोसंरचना, भूमि आवंटन प्रणाली तथा निवेशकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यक्रम में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव  आर्मस्ट्रांग पामे भी उपस्थित रहे।

कॉन्क्लेव में “सस्टेनेबल निवेश के लिए मध्यप्रदेश : नीति, साझेदारी और संभावनाएं” विषय पर विशेष पैनल डिस्कशन हुआ। चर्चा में निवेश, भविष्य उन्मुख औद्योगिक विकास मॉडल, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि प्रसंस्करण, तकनीक आधारित विकास तथा अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी पर विचार साझा किए गए। पैनल में सूफलेट माल्ट, ईडीएफ न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स, सनोफी, डसॉल्ट सिस्टम्स तथा एचएसबीसी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र, अभिरुचि अभिव्यक्तियों एवं सहमति पत्रों का आदान-प्रदान तथा द्विपक्षीय एवं व्यवसायिक बैठकों का आयोजन भी किया गया।

महत्वपूर्ण सेक्टर्स में हुए एमओयू और ईओआई

इंडो फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश और फ्रांस के बीच औद्योगिक, ऊर्जा, कृषि, शहरी विकास तथा शिक्षा क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली। कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न विभागों एवं संस्थानों द्वारा एमओयू एक्सचेंज और ईओआई प्रस्तुत किए गए। डीपीआईपी/एमपीआईडीसी और इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईएफसीसीआई) के मध्य निवेश सहयोग को लेकर एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने फ्रांस की प्रमुख कंपनी एंजी के साथ ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में सहभागिता दर्ज की। टेक्सटाइल सेक्टर में टेस्का टेक्सटाइल्स द्वारा निवेश रुचि प्रस्तुत की गई, जबकि डसॉल्ट सिस्टम्स ने शहरी और पब्लिक सर्विसेज आधारित तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के साथ सूफलेट माल्ट ने कृषि आधारित उद्योगों में सहयोग को लेकर रुचि दिखाई। शहरी विकास एवं आवास विभाग के साथ सिस्ट्रा तथा पोमा रोपवेज ने शहरी परिवहन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भागीदारी की संभावनाएं प्रस्तुत कीं। वहीं, मेडिकैप्स यूनिवर्सिटी और एआई वैनसिटी के मध्य शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग को लेकर प्रस्तुति दी गई। कॉन्क्लेव में हुई इन सहभागिताओं ने मध्यप्रदेश में फ्रांसीसी निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास की संभावनाओं को और मजबूत किया।

कार्यक्रम में लगभग 150 उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें फ्रांसीसी एवं भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, राजनयिक, शासकीय अधिकारी तथा नीति विशेषज्ञ शामिल रहे। कार्यक्रम में वर्तमान और संभावित फ्रांसीसी निवेशकों ने मध्यप्रदेश के विस्तारित औद्योगिक एवं आर्थिक परिदृश्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। इन निवेश संवादों से प्रदेश में औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण गति मिलेगी।