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SC-ST एक्ट के खिलाफ 7 फरवरी से बड़ा आंदोलन, अलंकार अग्निहोत्री ने किया ऐलान

वाराणसी
नौकरशाही से इस्तीफा देकर वैचारिक संघर्ष के रास्ते पर उतरे बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर अपने बड़े ऐलान को लेकर सुर्खियों में हैं. रविवार देर शाम वह वाराणसी स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विद्यामठ आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने शंकराचार्य से विधिवत आशीर्वाद लिया. मंत्रोच्चार, श्लोक-पाठ और वैदिक परंपरा के बीच हुई इस मुलाकात को अलंकार अग्निहोत्री अपने आगामी आंदोलन की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं.

आशीर्वाद लेने के बाद आजतक से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अगर 6 फरवरी तक केंद्र सरकार एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने का फैसला नहीं करती है, तो 7 फरवरी से देशभर के लोग दिल्ली कूच करेंगे. उन्होंने इसे केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि देश की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की शुरुआत बताया.

इस्तीफे से आंदोलन तक की यात्रा

अलंकार अग्निहोत्री बीते दिनों उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके वेदपाठी बटुकों के साथ हुई कथित घटना और नए यूजीसी के नए नियमों से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्हें निलंबित भी किया गया. नौकरशाही की एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित कुर्सी छोड़कर सड़क पर उतरने का उनका फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि यह निर्णय भावनात्मक नहीं, बल्कि वैचारिक था. उनका कहना है कि वह 35 वर्षों से एससी-एसटी एक्ट की विभीषिका को समाज में देख रहे हैं और अब यह कानून देश को जोड़ने की बजाय तोड़ने का काम कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक विभाजनकारी कानून है, जिसे सोच-समझकर लागू किया गया था और इसका दुरुपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है.
 

शंकराचार्य ने लिखकर पूछा हालचाल 

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से हुई मुलाकात को लेकर अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि महाराज जी इस समय मौन व्रत पर हैं, इसलिए अधिक बातचीत नहीं हो पाई. उन्होंने लिखकर उनका हाल-चाल पूछा और आशीर्वाद दिया. अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि किसी भी बड़े और अच्छे कार्य से पहले गुरुजनों का आशीर्वाद लेना भारतीय परंपरा है, और इसी भावना के तहत वह वाराणसी पहुंचे थे. उनके मुताबिक, शंकराचार्य से मिला आशीर्वाद उनके आंदोलन को नैतिक और आध्यात्मिक बल देगा. उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और समाज को अलग-अलग खांचों में बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि दोनों का उद्देश्य समाज का कल्याण होना चाहिए.

6 फरवरी की डेडलाइन, 7 फरवरी का ऐलान

अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 6 फरवरी तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर एससी-एसटी एक्ट को समाप्त नहीं किया गया, तो 7 फरवरी से देशभर से लोग दिल्ली की ओर कूच करेंगे. उनका दावा है कि यह आंदोलन अब किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में इसके लिए माहौल बन चुका है. उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में इस समय वेस्ट इंडिया कंपनी की सरकार चल रही है, जिसके सीईओ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एमडी गृह मंत्री अमित शाह हैं. उनके मुताबिक, अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो जनता सत्ता परिवर्तन के लिए सड़कों पर उतर आएगी.

सत्ता परिवर्तन के दावे और बयान

अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि 7 फरवरी को देश में ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जो पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने कहा कि अगर एससी-एसटी एक्ट नहीं हटाया गया, तो देश की जनता मौजूदा सत्ता को बेदखल करने का मन बना चुकी है. उनके बयान में भावनात्मक आक्रोश के साथ-साथ व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष झलकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी द्वारा लाया गया नया रेगुलेशन सरकार के लिए आत्मघाती साबित होगा. उनका आरोप है कि इस फैसले से सरकार ने अपना कोर वोटर ही नाराज कर दिया है और अगर मौजूदा हालात में चुनाव हुए तो सत्ताधारी दल को देशभर में शून्य सीटें मिल सकती हैं.

यूजीसी रेगुलेशन और सामाजिक तनाव

अलंकार अग्निहोत्री का मानना है कि यूजीसी का नया रेगुलेशन देश में सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला है. उन्होंने दावा किया कि अगर यह रेगुलेशन पूरी तरह लागू हो गया होता, तो देश में सिविल वॉर जैसी स्थिति बन सकती थी. उनके अनुसार, सरकार ने बिना जमीनी हकीकत समझे ऐसे नियम बना दिए, जिनसे समाज में वर्गों के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई. उन्होंने कहा कि मूल लड़ाई एससी-एसटी एक्ट की है. 

सामान्य और ओबीसी वर्ग का अलगाव की बात 
 

पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट का दावा है कि केंद्र सरकार से सामान्य वर्ग और ओबीसी वर्ग पूरी तरह अलग हो चुका है. उन्होंने मौजूदा सरकार को अल्पमत की सरकार बताते हुए कहा कि जनता का भरोसा अब इस व्यवस्था से उठ चुका है. उनके मुताबिक, सरकार समाज के बड़े हिस्से की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है. राजनीतिक आकांक्षाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि उनकी कोई व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है. उनका उद्देश्य केवल देश का कल्याण है. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें राजनीति करनी होती, तो वह अब तक कई दलों के नेताओं से संपर्क में होते और बंद कमरों में बातचीत कर रहे होते. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नौकरी में लौटने का कोई सवाल ही नहीं उठता. उनके अनुसार, अभी देश और समाज से जुड़े कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर काम करना जरूरी है.

योगी आदित्यनाथ और केंद्र-राज्य के संबंध पर भी बोले 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि बटुकों के मान-हनन के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी थी और आज भी उसी पर खड़े हैं. हालांकि उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि दिल्ली के तंत्र के सामने इस तरह की घटनाओं पर खुलकर बात क्यों नहीं हो पा रही है. अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि देश में इस समय दो तरह की सरकारें चल रही हैं एक केंद्र की और दूसरी राज्यों की. उनके मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी भी देश की समस्याओं को बढ़ा रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि बटुकों के मान-हनन के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी थी और आज भी उसी पर खड़े हैं. हालांकि उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि दिल्ली के तंत्र के सामने इस तरह की घटनाओं पर खुलकर बात क्यों नहीं हो पा रही है. अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि देश में इस समय दो तरह की सरकारें चल रही हैं एक केंद्र की और दूसरी राज्यों की. उनके मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी भी देश की समस्याओं को बढ़ा रही है.