गुवाहाटी
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) को आदेश दिया है कि वह नेशनल हाईवे-29 के निर्माण के दौरान एक स्थानीय भूस्वामी की संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करे। अदालत ने कहा कि नागरिक को उसकी संपत्ति के लाभप्रद उपयोग से वंचित करना उसके मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 और 300A) का स्पष्ट उल्लंघन है। कोहिमा निवासी थजाओ सेखोसे ने अदालत में याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि NH-29 को फोर-लेन बनाने के दौरान की गई भारी खुदाई और मिट्टी कटाई की वजह से उनके क्षेत्र में भूस्खलन शुरू हो गया।
उनका आरोप है कि इसके कारण उनकी तीन मंजिला आरसीसी इमारत, सूअर पालन केंद्र और सीढ़ीदार खेत पूरी तरह अनुपयोगी हो गए। निर्माण कार्य के दौरान उनके करीब 80 पेड़ काट दिए गए। उनका निजी रास्ता बंद कर दिया गया और वहां बिना अनुमति कचरा फेंका गया।
जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने 20 जनवरी को दिए अपने आदेश में NHIDCL की दलीलों को खारिज करते हुए कई अहम बातें कहीं। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति का नुकसान केवल आर्थिक नहीं बल्कि आजीविका के अधिकार (अनुच्छेद 21) और संपत्ति के अधिकार (अनुच्छेद 300A) का हनन है। याचिकाकर्ता को मुआवजा न देना समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) के खिलाफ है, क्योंकि इसी तरह के अन्य प्रभावित भूस्वामियों को NHIDCL पहले ही मुआवजा दे चुका था।
NHIDCL ने तर्क दिया था कि इसके लिए ठेकेदार कंपनी (गायत्री प्रोजेक्ट्स लिमिटेड) जिम्मेदार है। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य कार्यकारी प्राधिकरण होने के नाते जवाबदेही NHIDCL की है। वह भुगतान करने के बाद ठेकेदार से इसकी वसूली कर सकता है।
3 महीने के भीतर भुगतान का आदेश
अदालत ने नुकसान का आकलन करते हुए मुआवजे का आदेश दिया है। करीब 1.16 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ है। 13.93 लाख के पेड़ काटे गए। अदालत ने सख्त निर्देश दिया है कि NHIDCL इस राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ता को करे।
आपको बता दें कि याचिकाकर्ता 2018 से ही मुआवजे के लिए भटक रहा था। कोर्ट ने कहा कि 7 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद पीड़ित को अब सिविल कोर्ट भेजना अनुचित होगा, इसलिए हाईकोर्ट ने सीधे मुआवजे का आदेश जारी किया।
Dainik Aam Sabha