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इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन प्रोजेक्ट 47% पूरा, ब्रिज-फ्लाईओवर बने अड़चन; जनवरी 2027 की डेडलाइन तय

इंदौर
उज्जैन में होने वाले वर्ष 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए इंदौर से उज्जैन को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क को चार लेन से छह लेन में बदलने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। पिछले साल जनवरी में शुरू हुए इस निर्माण कार्य को अब एक वर्ष पूरा हो चुका है। विभाग का दावा है कि अब तक परियोजना का लगभग 47 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है, हालांकि पुलों और फ्लाईओवर का काम अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

तय समय सीमा और लक्ष्य
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन 15 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। लक्ष्य के अनुसार, इस सिक्स लेन सड़क का निर्माण 15 जनवरी तक पूरा किया जाना है। वर्तमान प्रगति को देखते हुए अधिकारियों का मानना है कि आने वाले एक साल में निर्माण की गति को और अधिक बढ़ाना होगा ताकि समय सीमा में प्रोजेक्ट को जनता को समर्पित किया जा सके। एमपीआरडीसी के डिविजनल मैनेजर गगन भंवर ने बताया कि सड़क और ब्रिज का काम तेजी से चल रहा है और लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।
 
48 किलोमीटर का कायाकल्प
गौरतलब है कि वर्ष 2016 के सिंहस्थ से पहले इस मार्ग को फोर लेन किया गया था। अब लवकुश चौराहा (इंदौर) से हरिफाटक ब्रिज (उज्जैन) तक की 48 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर एक-एक अतिरिक्त लेन जोड़ी जा रही है। इस पूरी परियोजना में यातायात को सुगम बनाने के लिए तीन फ्लाईओवर, आठ अंडरपास और तीन बड़े ब्रिज का निर्माण शामिल है। फिलहाल निनौरा से बारोली के बीच सड़क चौड़ीकरण का कार्य दोनों दिशाओं में समानांतर रूप से चल रहा है।

शुरुआती अड़चनें और मानसून का प्रभाव
परियोजना की शुरुआत में निर्माण एजेंसी को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक डायवर्जन की योजना बनाने, अतिक्रमण हटाने और स्थानीय व्यवस्थाओं के तालमेल के कारण शुरुआती महीनों में काम की गति प्रभावित हुई। इसके बाद मानसून की बारिश ने भी निर्माण कार्यों में बाधा डाली। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि अब सभी तकनीकी और प्राकृतिक अड़चनों को पार कर लिया गया है और एक साथ कई हिस्सों में निर्माण कार्य को गति दी गई है।
 
अतिक्रमण हटाने की चुनौती
सड़क चौड़ीकरण के लिए राहत की बात यह है कि नई जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विभाग के पास पहले से ही पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। हालांकि, वर्षों से खाली पड़ी इस जमीन पर कई स्थानों पर अतिक्रमण हो गया है। विशेषकर लवकुश चौराहा से बारोली तक के हिस्से में सड़क के दोनों ओर कई अवैध निर्माण खड़े हो गए हैं। प्रशासन का मानना है कि अतिक्रमण हटने के बाद ही इस महत्वपूर्ण हिस्से में काम तेजी पकड़ सकेगा। इसके लिए एमपीआरडीसी ने जिला प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने की मांग की है।