नई दिल्ली
दुनिया की कुल आबादी के 80 फीसदी लोग अब शहरों में ही बसते हैं। गांवों की याद सबको सताती है और लोग पुरानी जिंदगी जीना चाहते हैं, लेकिन इस बीच शहरीकरण के आकर्षण का यह आंकड़ा भी चौंकाने वाला है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया की 80 फीसदी आबादी अब शहरी क्षेत्रों में बसी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बड़े पैमाने पलायन के चलते लोग शहरों में पहुंच गए हैं। इसके अलावा तमाम गांव भी ऐसे हैं, जो अब विकास की दौड़ में बढ़ते हुए शहर में ही तब्दील हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट World Urbanization Prospects 2025 के मुताबिक दुनिया के 81 फीसदी लोग अब शहरों में हैं।
दिलचस्प बात यह है कि 2018 में ही यह आंकड़ा महज 55 फीसदी था। रिपोर्ट के अनुसार 45 फीसदी लोग शहरों में बसे हैं तो वहीं 36 फीसदी लोग कस्बों के नागरिक हैं। यह रिपोर्ट पैट्रिक गेरलैंड के नेतृत्व में तैयार की गई है। यही नहीं अनुमान है कि 2050 तक दुनिया के 83 फीसदी लोग शहरों में पहुंच जाएंगे। इस रिपोर्ट को तैयार करने में अलग-अलग देशों के पैरामीटर का भी ख्याल रखा गया है। जैसे जापान में यदि 50 हजार लोगों की आबादी है तो उसे शहर का दर्जा दिया जाता है। लेकिन डेनमार्क में यह आंकड़ा महज 200 लोगों का ही है।
इस रिपोर्ट के लिए यह पैमाना तैयार किया गया कि 50 हजार लोगों की आबादी हो और कम से कम प्रति वर्ग किलोमीटर के दायरे में 1500 लोग बसे हों। इसके अलावा कस्बों के लिए यह आंकड़ा 5000 का रखा गया है और प्रति वर्ग किलोमीटर 300 लोगों की आबादी का पैमाना रखा गया। इस तरह दुनिया की कुल 19 फीसदी आबादी ही अब विशुद्ध रूप से गांवों में बसी है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सभी हिस्सों में शहरीकरण बढ़ रहा है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों को लेकर रिपोर्ट कहती है कि यहां शिक्षा और रोजगार के लिए लोग मुख्य तौर पर शहरों का रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट यह भी कहती है कि शहरीकरण में बिना प्लानिंग के इजाफा होने से कुछ परेशानियां भी आ रही हैं। जैसे शहर का विस्तार हो जाए और सार्वजनिक परिवहन की उसके मुताबिक व्यवस्था ना हो तो रहना मुश्किल होता है। इसके अलावा पलूशन में भी इजाफा हो रहा है क्योंकि निजी वाहनों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। वहीं यदि शहरों को प्लानिंग के साथ बसाया जाए तो वे ज्यादा कारगर होंगे और मानव जीवन के लिए ज्यादा सुविधायुक्त भी साबित होंगे।
Dainik Aam Sabha