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आदिवासी समाज को पहले की सरकारों ने नहीं दी प्राथमिकता : प्रधानमंत्री मोदी

भोपाल : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आदिवासी समाज को उचित महत्व व प्राथमिकता न देकर पहले की सरकारों ने जो अपराध किया उसका जिक्र हर मंच से किया जाना जरुरी है। उन्होंने देश की आजादी और सांस्कृतिक यात्रा में जनजाति समाज का अटूट योगदान बताते हुए आरोप लगाया कि दशकों तक पिछली सरकारों ने अपनी स्वार्थ भरी नीति को प्राथमिकता दी और देश की 10 प्रतिशत जनजातीय आबादी को नजरअंदाज किया गया।

बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर यहां जम्बूरी मैदान पर आयोजित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के तौर पर आयोजित आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘आज जब हम राष्ट्र निर्माण में जनजाति समाज के योगदान की चर्चा करते हैं तो कुछ लोगों को हैरानी होती है। ऐसे लोगों को विश्वास नहीं होता है कि जनजाति समाज का भारत की संस्कृति में कितना बड़ा योगदान है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कि जनजाति समाज के योगदान को देश को बताया ही नहीं गया, अंधेरे में ही रखा गया। उन्होंने दावा किया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आजादी के बाद दशकों तक जिन्होंने सरकार चलायी, उन्होंने अपनी स्वार्थ भरी नीति को प्राथमिकता दी। देश की 10 प्रतिशत आबादी को नजरअंदाज किया। भारत की सांस्कृतिक यात्रा में जनजाति समाज का योगदान अटूट रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘ आदिवासी समाज को उचित महत्व, प्राथमिकता न देकर पहले की सरकार ने जो अपराध किया है उसे हर मंच से बोला जाना जरूरी है। कैसे देश में कुछ राजनीतिक दलों ने सुख सुविधा व विकास से आदिवासी समाज को वंचित रखा। चुनाव के नाम पर, अभावों के नाम पर वोट मांगे गए, सत्ता पाई गई लेकिन समुदाय के लिए जितना और जब करना चाहिए था, वह कम पड़ गया और जनजाति समाज को असहाय छोड़ दिया गया।”

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